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mahabharat 6.107.28: पाण्डुपुत्र! महाराज! कृपा करके मुझे भी अनुमति दीजिए। मैं भीष्म के साथ युद्ध करूँगा। आपकी अनुमति पाकर मैं इस महायुद्ध में क्या नहीं कर सकता?॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.107.28 
मां वा नियुङ्क्ष्व सौहार्दाद् योत्स्ये भीष्मेण पाण्डव।
त्वत्प्रयुक्तो महाराज किं न कुर्यां महाहवे॥ २८॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र! महाराज! कृपा करके मुझे भी अनुमति दीजिए। मैं भीष्म के साथ युद्ध करूँगा। आपकी अनुमति पाकर मैं इस महायुद्ध में क्या नहीं कर सकता?॥ 28॥
 
Pandu's son! Maharaj! Please give me permission too out of kindness. I will fight with Bhishma. After getting your permission, what can I not do in this great war?॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)