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mahabharat 6.107.27: अर्जुन और भीमसेन वायु और अग्नि के समान तेजस्वी हैं। माद्री के पुत्र नकुल और सहदेव भी पराक्रम में दोनों इन्द्रियों के समान हैं॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.107.27 
अर्जुनो भीमसेनश्च वाय्वग्निसमतेजसौ।
माद्रीपुत्रौ च विक्रान्तौ त्रिदशानामिवेश्वरौ॥ २७॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन और भीमसेन वायु और अग्नि के समान तेजस्वी हैं। माद्री के पुत्र नकुल और सहदेव भी पराक्रम में दोनों इन्द्रियों के समान हैं॥ 27॥
 
Arjuna and Bhimasena are as radiant as the wind and the fire. Madri's sons Nakula and Sahadeva are also like the two senses in valour.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)