Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.107.23: इस समय मैं जीवन को बहुत महत्वपूर्ण समझता हूँ। आज तो जीवन भी दुर्लभ हो रहा है। अब से मेरे जीवन के जितने भी दिन शेष हैं, मैं केवल उत्तम धर्म का ही पालन करूँगा॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.107.23 
जीवितं बहु मन्येऽहं जीवितं ह्यद्य दुर्लभम्।
जीवितस्याद्य शेषेण चरिष्ये धर्ममुत्तमम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इस समय मैं जीवन को बहुत महत्वपूर्ण समझता हूँ। आज तो जीवन भी दुर्लभ हो रहा है। अब से मेरे जीवन के जितने भी दिन शेष हैं, मैं केवल उत्तम धर्म का ही पालन करूँगा॥ 23॥
 
‘At this time I consider life to be very important. Today, even life is becoming rare. From now on, whatever days are left in my life, I will follow only the best religion.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)