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mahabharat 6.107.20: जैसे पतंगा प्रज्वलित अग्नि की ओर केवल मृत्यु को प्राप्त होने के लिए ही दौड़ता है, वैसे ही हमने भी भीष्म पर आक्रमण करके केवल मृत्यु को ही चुना है॥ 20॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.107.20 
यथा प्रज्वलितं वह्निं पतङ्ग: समभिद्रवन्।
एकतो मृत्युमभ्येति तथाहं भीष्ममीयिवान्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जैसे पतंगा प्रज्वलित अग्नि की ओर केवल मृत्यु को प्राप्त होने के लिए ही दौड़ता है, वैसे ही हमने भी भीष्म पर आक्रमण करके केवल मृत्यु को ही चुना है॥ 20॥
 
Just like a kite running towards a blazing fire only to meet death, similarly by attacking Bhishma we too have chosen death only.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)