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mahabharat 6.107.2-4: हे भरतपुत्र! तत्पश्चात् राजा युधिष्ठिर ने देखा कि संध्या हो गई है। भीष्म के द्वारा घायल होकर मेरी सेना भयभीत होकर आत्मसमर्पण कर चुकी है। किसी में भी युद्ध करने का उत्साह नहीं है। सारी सेना बाणों से घायल होकर महान पीड़ा से कराह रही है। बहुत से सैनिक युद्धभूमि से विमुख होकर भागने लगे हैं। दूसरी ओर महारथी भीष्म युद्धभूमि में सबको क्रोधित कर रहे हैं। सोमवंशी महारथी पराजित होकर अपना उत्साह खो चुके हैं और भयंकर प्रातःकाल का समय आ पहुँचा है। इन सब बातों पर विचार करके राजा युधिष्ठिर ने सेना को युद्ध से हटा लेना ही श्रेयस्कर समझा॥2-4॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 2-4
 
 
श्लोक  6.107.2-4 
ततो युधिष्ठिरो राजा संध्यां संदृश्य भारत।
वध्यमानं च भीष्मेण त्यक्तास्त्रं भयविह्वलम्॥ २॥
(निरुत्साहं बलं दृष्ट्वा पीडितं शरविक्षतम्।)
स्वसैन्यं च परावृत्तं पलायनपरायणम्।
भीष्मं च युधि संरब्धं पीडयन्तं महारथम्॥ ३॥
सोमकांश्च जितान् दृष्ट्वा निरुत्साहान् महारथान्।
(निशामुखं च सम्प्रेक्ष्य घोररूपं भयानकम्।)
चिन्तयित्वा ततो राजा अवहारमरोचयत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! तत्पश्चात् राजा युधिष्ठिर ने देखा कि संध्या हो गई है। भीष्म के द्वारा घायल होकर मेरी सेना भयभीत होकर आत्मसमर्पण कर चुकी है। किसी में भी युद्ध करने का उत्साह नहीं है। सारी सेना बाणों से घायल होकर महान पीड़ा से कराह रही है। बहुत से सैनिक युद्धभूमि से विमुख होकर भागने लगे हैं। दूसरी ओर महारथी भीष्म युद्धभूमि में सबको क्रोधित कर रहे हैं। सोमवंशी महारथी पराजित होकर अपना उत्साह खो चुके हैं और भयंकर प्रातःकाल का समय आ पहुँचा है। इन सब बातों पर विचार करके राजा युधिष्ठिर ने सेना को युद्ध से हटा लेना ही श्रेयस्कर समझा॥2-4॥
 
O son of Bharata! After that King Yudhishthira saw that it was evening. My army had surrendered in fear after being wounded by Bhishma. No one had the enthusiasm to fight. The entire army was wounded by arrows and was in great pain. Many soldiers turned away from the battle and started running away. On the other hand, the great warrior Bhishma was infuriating everyone on the battlefield. The great warriors of Somka dynasty had lost their enthusiasm after being defeated and the dreadful morning time had arrived. After thinking about all these things, King Yudhishthira thought it best to withdraw the army from the battle.॥2-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)