Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.107.19: ‘दुर्धर्ष पराक्रमी श्रीकृष्ण! अब मैं वन में जाऊँगा। वन में जाना मेरे लिए कल्याणकारी होगा। मुझे युद्ध अच्छा नहीं लगता; क्योंकि भीष्म उसमें सदैव हमारे सैनिकों का संहार करते रहे हैं।॥19॥ | mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वनं यास्यामि दुर्धर्ष श्रेयो वै तत्र मे गतम्।
न युद्धं रोचते कृष्ण हन्ति भीष्मो हि न: सदा॥ १९॥
अनुवाद
‘दुर्धर्ष पराक्रमी श्रीकृष्ण! अब मैं वन में जाऊँगा। वन में जाना मेरे लिए कल्याणकारी होगा। मुझे युद्ध अच्छा नहीं लगता; क्योंकि भीष्म उसमें सदैव हमारे सैनिकों का संहार करते रहे हैं।॥19॥
‘Durdharsh valiant Shri Krishna! Now I will go to the forest. Going to the forest will be beneficial for me. I do not like the war; because Bhishma has always been destroying our soldiers in it.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥