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mahabharat 6.107.16-17: ‘युद्धभूमि में क्रोधित यमराज, वज्रधारी इन्द्र, पाशधारी वरुण और गदाधारी कुबेर भी पराजित किये जा सकते हैं; किन्तु इस महासमर में क्रोधित भीष्म को परास्त करना असम्भव है ॥16-17॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  6.107.16-17 
शक्यो जेतुं यम: क्रुद्धो वज्रपाणिश्च देवराट्॥ १६॥
वरुण: पाशभृच्चापि सगदो वा धनेश्वर:।
न तु भीष्म: सुसंक्रुद्ध: शक्यो जेतुं महाहवे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘युद्धभूमि में क्रोधित यमराज, वज्रधारी इन्द्र, पाशधारी वरुण और गदाधारी कुबेर भी पराजित किये जा सकते हैं; किन्तु इस महासमर में क्रोधित भीष्म को परास्त करना असम्भव है ॥16-17॥
 
‘In the battlefield, even the angry Yamraj, Indra wielding the thunderbolt, Varun wielding the noose or Kubera wielding the mace can be defeated; But it is impossible to defeat the angry Bhishma in this great battle. 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)