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mahabharat 6.107.14: वह प्रज्वलित अग्नि के समान अपने बाणों की ज्वालाओं से हमारी सेना में सब को जलाकर भस्म कर रहा है। हम लोग उस महापुरुष की ओर देख भी नहीं सकते॥14॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.107.14 
न चैवैनं महात्मानमुत्सहामो निरीक्षितुम्।
लेलिह्यमानं सैन्येषु प्रवृद्धमिव पावकम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वह प्रज्वलित अग्नि के समान अपने बाणों की ज्वालाओं से हमारी सेना में सब को जलाकर भस्म कर रहा है। हम लोग उस महापुरुष की ओर देख भी नहीं सकते॥14॥
 
He is burning to ashes everyone in our army with the flames of his arrows like a blazing fire. We are not even able to look at this great man.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)