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mahabharat 6.107.13: "हे भगवान कृष्ण! देखो, भयंकर पराक्रमी महात्मा भीष्म हमारी सेना को उसी प्रकार नष्ट कर रहे हैं, जैसे हाथी सरकण्डों के वन को रौंद डालता है।" 13.   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.107.13 
कृष्ण पश्य महात्मानं भीष्मं भीमपराक्रमम्।
गजं नलवनानीव विमृद्नन्तं बलं मम॥ १३॥
 
 
अनुवाद
"हे भगवान कृष्ण! देखो, भयंकर पराक्रमी महात्मा भीष्म हमारी सेना को उसी प्रकार नष्ट कर रहे हैं, जैसे हाथी सरकण्डों के वन को रौंद डालता है।" 13.
 
"Lord Krishna! Look, the fearsome and valiant Mahatma Bhishma is destroying our army just as an elephant tramples a forest of reeds." 13.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)