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mahabharat 6.107.106: कुरुवंश के प्रधान भीष्म शिखण्डी को न मारने का निश्चय करते हैं, क्योंकि वह पहले कन्या रूप में उत्पन्न हुआ था और बाद में पुरुष हो गया था ॥106॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  6.107.106 
श्रुतं हि कुरुमुख्यस्य नाहं हन्यां शिखण्डिनम्।
कन्या ह्येषा पुरा भूत्वा पुरुष: समपद्यत॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
कुरुवंश के प्रधान भीष्म शिखण्डी को न मारने का निश्चय करते हैं, क्योंकि वह पहले कन्या रूप में उत्पन्न हुआ था और बाद में पुरुष हो गया था ॥106॥
 
Bhishma, the head of the Kuru clan, is determined not to kill Shikhandi because he was first born as a girl and later became a man.॥ 106॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)