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mahabharat 6.107.104: इसलिए मैं सोचता हूँ कि हम सब लोग शिखण्डी को उसके सामने खड़ा करके उस पर अस्त्र-शस्त्रों का प्रहार करके गंगानन्दन भीष्म को मार डालेंगे ॥104॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  6.107.104 
ते वयं प्रमुखे तस्य पुरस्कृत्य शिखण्डिनम्।
गाङ्गेयं पातयिष्याम उपायेनेति मे मति:॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
इसलिए मैं सोचता हूँ कि हम सब लोग शिखण्डी को उसके सामने खड़ा करके उस पर अस्त्र-शस्त्रों का प्रहार करके गंगानन्दन भीष्म को मार डालेंगे ॥104॥
 
Therefore I think that all of us will make Shikhandi stand in front of him and kill Ganganandan Bhishma by attacking him with weapons. ॥104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)