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mahabharat 6.107.101: चाहे वह महान् गुरु हो, वृद्ध हो अथवा सर्वगुण संपन्न पुरुष हो, यदि वह शस्त्र लेकर स्वयं को मारने के लिए आ रहा हो, तो उस आततायी को अवश्य मार डालना चाहिए ॥101॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  6.107.101 
ज्यायांसमपि चेद् वृद्धं गुणैरपि समन्वितम्।
आततायिनमायान्तं हन्याद् घातकमात्मन:॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
चाहे वह महान् गुरु हो, वृद्ध हो अथवा सर्वगुण संपन्न पुरुष हो, यदि वह शस्त्र लेकर स्वयं को मारने के लिए आ रहा हो, तो उस आततायी को अवश्य मार डालना चाहिए ॥101॥
 
Even if he is a great teacher, an old man or a man with all the virtues, if he is coming to kill himself with a weapon, then that terrorist must be killed. 101॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)