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mahabharat 6.107.100: अर्जुन! तुम दृढ़ निश्चय करके भीष्म को मार डालो और मेरा यह कथन सुनो, जो प्राचीन काल में परम बुद्धिमान बृहस्पतिजी ने देवराज इन्द्र से कहा था॥100॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  6.107.100 
जहि भीष्मं स्थिरो भूत्वा शृणु चेदं वचो मम।
यथोवाच पुरा शक्रं महाबुद्धिर्बृहस्पति:॥ १००॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन! तुम दृढ़ निश्चय करके भीष्म को मार डालो और मेरा यह कथन सुनो, जो प्राचीन काल में परम बुद्धिमान बृहस्पतिजी ने देवराज इन्द्र से कहा था॥100॥
 
Arjun! You become steadfast and kill Bhishma and listen to this statement of mine, which in ancient times was told by the very intelligent Brihaspatiji to Devraj Indra. 100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)