श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक d1-d3h
 
 
श्लोक  6.106.d1-d3h 
(सारथ्यं निपुणं कुर्वन् प्रत्यदृश्यत संयुगे।
भीष्मस्तावत् सुसंक्रुद्ध: पुनर्बाणान् मुमोच ह॥
पार्थाय युधि राजेन्द्र तदद्भुतमिवाभवत्।
अर्जुनस्तु सुसंक्रुद्ध: पितामहमरिंदम:।
अवर्षद् बाणवर्षेण योद्धुं ह्यभिमुखे स्थितम्॥
तावुभौ युधि दुर्धर्षौ युयुधाते परस्परम्।)
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में भगवान श्रीकृष्ण बड़ी कुशलता से सारथि चलाते हुए दिखाई दे रहे थे। राजन! भीष्म अत्यन्त क्रोध में भरकर पार्थ पर बार-बार बाणों की वर्षा कर रहे थे। यह अद्भुत बात थी। तभी शत्रुओं का नाश करने वाले अर्जुन भी क्रोध में भरकर युद्ध के लिए सामने खड़े भीष्म पर बाणों की वर्षा करने लगे। वे दोनों महारथी आपस में युद्ध कर रहे थे।
 
Lord Krishna was seen skillfully doing charioteering on the battlefield. King! Bhishma, filled with great anger, kept showering arrows on Partha again and again. That was an amazing thing. Then Arjuna, the destroyer of enemies, also filled with anger, started showering arrows on Bhishma who was standing in front of him for the battle. Both those fierce warriors were fighting with each other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)