श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  6.106.85 
विमृद्नतस्तस्य तु पाण्डुसेना-
मस्तं जगामाथ सहस्ररश्मि:।
ततो बलानां श्रमकर्शितानां
मनोऽवहारं प्रति सम्बभूव॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
जब भीष्म पाण्डव सेना को इस प्रकार कुचल रहे थे, उसी समय सहस्त्र किरणों से सुशोभित सूर्यदेव पश्चिम दिशा में चले गये। उस समय समस्त सेनाएँ अपने परिश्रम से थककर यह कामना करने लगीं कि अब युद्ध बन्द हो जाना चाहिए।
 
While Bhishma was trampling the Pandava army in this manner, at the same time the Sun, adorned with thousands of rays, went to the west. At that time all the armies, tired from their exertions, wished that the war should now stop.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि नवमदिवसयुद्धसमाप्तौ षडधिकशततमोऽध्याय:॥ १०६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें नवें दिनके युद्धका समाप्तिविषयक एक सौ छठा अध्याय पूरा हुआ॥ १०६॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ८९ १/२ श्लोक हैं।]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)