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mahabharat 6.106.66-67h: गोविन्द! आज इस युद्ध में तीनों लोकों ने मेरा सम्मान किया है। अनघ! मैं आपका दास हूँ। आप अपनी इच्छानुसार मुझ पर आक्रमण कर सकते हैं।'॥66 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 66-67h
 
 
श्लोक  6.106.66-67h 
सम्भावितोऽस्मि गोविन्द त्रैलोक्येनाद्य संयुगे॥ ६६॥
प्रहरस्व यथेष्टं वै दासोऽस्मि तव चानघ।
 
 
अनुवाद
गोविन्द! आज इस युद्ध में तीनों लोकों ने मेरा सम्मान किया है। अनघ! मैं आपका दास हूँ। आप अपनी इच्छानुसार मुझ पर आक्रमण कर सकते हैं।'॥66 1/2॥
 
‘Govind! Today in this war I have been honoured by the three worlds. Anagh! I am your slave. You may attack me as per your wish.’॥ 66 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)