श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 65-66h
 
 
श्लोक  6.106.65-66h 
मामद्य सात्वतश्रेष्ठ पातयस्व महाहवे।
त्वया हि देव संग्रामे हतस्यापि ममानघ॥ ६५॥
श्रेय एव परं कृष्ण लोके भवति सर्वत:।
 
 
अनुवाद
सात्वतशिरोमणि! आज इस महायुद्ध में मेरा वध करो। हे भगवन्! निष्पाप श्रीकृष्ण! यदि तुम युद्ध में मारे भी जाओ, तो भी संसार में सर्वत्र मेरा परम कल्याण होगा। 65 1/2॥
 
‘Satvatashiromane! Kill me today in this great battle. God! Sinless Shri Krishna! Even if you die in battle, my ultimate welfare will be there everywhere in the world. 65 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)