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श्लोक  6.106.64 
उवाच चैव गोविन्दमसम्भ्रान्तेन चेतसा।
एह्येहि पुण्डरीकाक्ष देवदेव नमोऽस्तु ते॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
उसी समय उन्होंने चिन्तारहित मन से भगवान् गोविन्द को सम्बोधित करके कहा - 'आइये, आइए, कमलनयन! देवदेव! आपको नमस्कार है॥64॥
 
At the same time, he addressed Lord Govind with an anxiety-free mind and said – 'Come, come, Kamalanayan! Devdev! Greetings to you. 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)