श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  6.106.64 
उवाच चैव गोविन्दमसम्भ्रान्तेन चेतसा।
एह्येहि पुण्डरीकाक्ष देवदेव नमोऽस्तु ते॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
उसी समय उन्होंने चिन्तारहित मन से भगवान् गोविन्द को सम्बोधित करके कहा - 'आइये, आइए, कमलनयन! देवदेव! आपको नमस्कार है॥64॥
 
At the same time, he addressed Lord Govind with an anxiety-free mind and said – 'Come, come, Kamalanayan! Devdev! Greetings to you. 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)