Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.106.63: उस महासमर में कमल-नेत्र श्रीकृष्ण को आते देख भीष्म ने तनिक भी भय न खाते हुए अपना विशाल धनुष खींचना आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  6.106.63 
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य पुण्डरीकाक्षमाहवे।
असम्भ्रमं रणे भीष्मो विचकर्ष महद् धनु:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
उस महासमर में कमल-नेत्र श्रीकृष्ण को आते देख भीष्म ने तनिक भी भय न खाते हुए अपना विशाल धनुष खींचना आरम्भ कर दिया।
 
On seeing the lotus-eyed Sri Krishna approaching in that great battle, Bhishma, without being afraid at all, began to pull his huge bow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)