Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.106.58: सम्पूर्ण जगत के स्वामी, अनन्त तेजोमय भगवान श्रीकृष्ण क्रोध से लाल नेत्रों वाले तथा भीष्म को मारने की इच्छा से अपने पैरों की ध्वनि से पृथ्वी को फाड़ रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  6.106.58 
दारयन्निव पद्भॺां स जगतीं जगदीश्वर:।
क्रोधताम्रेक्षण: कृष्णो जिघांसुरमितद्युति:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण जगत के स्वामी, अनन्त तेजोमय भगवान श्रीकृष्ण क्रोध से लाल नेत्रों वाले तथा भीष्म को मारने की इच्छा से अपने पैरों की ध्वनि से पृथ्वी को फाड़ रहे थे।
 
The Lord of the entire universe, the infinitely radiant Lord Krishna, with his eyes red with anger and the desire to kill Bhishma, was tearing the earth with the sound of his feet. 58.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)