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mahabharat 6.106.52: उस समय भीष्म के बाणों से घायल और उनके सींगों के प्रहार से घायल हुए दोनों सिंहपुरुष श्रीकृष्ण और अर्जुन दो उग्र वृषभों के समान शोभायमान हो रहे थे ॥52॥   |   mahabharat अध्याय 6.106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.106.52 
शुशुभाते नरव्याघ्रौ तौ भीष्मशरविक्षतौ।
गोवृषाविव संरब्धौ विषाणोल्लिखिताङ्कितौ॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
उस समय भीष्म के बाणों से घायल और उनके सींगों के प्रहार से घायल हुए दोनों सिंहपुरुष श्रीकृष्ण और अर्जुन दो उग्र वृषभों के समान शोभायमान हो रहे थे ॥52॥
 
At that time both the lion-men, Sri Krishna and Arjuna, wounded by Bhishma's arrows and injured by the blows of his horns, were looking as graceful as two furious bulls. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)