श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 49-50
 
 
श्लोक  6.106.49-50 
साधु साधु महाबाहो साधु कुन्तीसुतेति च॥ ४९॥
समाभाष्यैवमपरं प्रगृह्य रुचिरं धनु:।
मुमोच समरे भीष्म: शरान् पार्थरथं प्रति॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु! कुन्तीपुत्र! बहुत अच्छा, बहुत अच्छा, तुम्हें बधाई।’ ऐसा कहकर भीष्म ने पुनः दूसरा सुन्दर धनुष लिया और युद्धस्थल में अर्जुन के रथ पर बाणों की वर्षा करने लगे।
 
Mahabahu! Son of Kunti! Very good, very good, congratulations to you.' Saying so, Bhishma again took another beautiful bow and began showering arrows towards Arjuna's chariot in the battle-field. 49-50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)