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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  6.106.47-48h 
चकर्ष च ततो दोर्भ्यां धनुर्जलदनि:स्वनम्॥ ४७॥
अथास्य तदपि क्रुद्धश्चिच्छेद धनुरर्जुन:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने दोनों हाथों से उस धनुष को खींचा, जिससे मेघों के समान गम्भीर ध्वनि उत्पन्न हुई। इससे क्रोधित होकर अर्जुन ने उस धनुष को भी काट डाला।
 
Thereafter he pulled that bow with both hands which made a deep sound like the clouds. Arjuna, enraged at this, cut that bow also. 47 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)