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mahabharat 6.106.45-46h: तब कुन्तीपुत्र ने मेघ के समान घोर शब्द करने वाला अपना दिव्य धनुष हाथ में लिया और तीखे बाणों से भीष्म के धनुष को काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 6.106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  6.106.45-46h 
तत: पार्थो धनुर्गृह्य दिव्यं जलदनि:स्वनम्॥ ४५॥
पातयामास भीष्मस्य धनुश्छित्त्वा शितै: शरै:।
 
 
अनुवाद
तब कुन्तीपुत्र ने मेघ के समान घोर शब्द करने वाला अपना दिव्य धनुष हाथ में लिया और तीखे बाणों से भीष्म के धनुष को काट डाला।
 
Then, the son of Kunti took in his hand his divine bow which made a loud noise like that of a cloud and cut off Bhishma's bow with sharp arrows. 45 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)