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mahabharat 6.106.44-45h: भगवान श्रीकृष्ण बिना किसी घबराहट के तथा बड़े धैर्य के साथ भीष्म के बाणों से घायल हुए घोड़ों को शीघ्रता से हांक रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  6.106.44-45h 
वासुदेवस्त्वसम्भ्रान्तो धैर्यमास्थाय सत्वर:॥ ४४॥
चोदयामास तानश्वान् विनुन्नान् भीष्मसायकै:।
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण बिना किसी घबराहट के तथा बड़े धैर्य के साथ भीष्म के बाणों से घायल हुए घोड़ों को शीघ्रता से हांक रहे थे।
 
Lord Krishna, without any panic and with great patience was quickly driving those horses which were injured by Bhishma's arrows. 44 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)