श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  6.106.43-44h 
क्षणेन स रथस्तस्य सहय: सहसारथि:॥ ४३॥
शरवर्षेण महता न प्राज्ञायत भारत।
 
 
अनुवाद
भरत! बाणों की भारी वर्षा के कारण एक ही क्षण में सारथि और घोड़ों सहित उसका रथ इस प्रकार लुप्त हो गया कि उनका कुछ भी पता नहीं चल सका॥43 1/2॥
 
Bhaarat! Due to the heavy shower of arrows in a single moment, his chariot along with the charioteer and the horses vanished in such a way that they could not be traced at all. ॥ 43 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)