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mahabharat 6.106.38-39h: प्रभु! अवध के महापुरुषों को मारकर मैं नरक से भी बदतर राज्य प्राप्त करूँ अथवा वनवास में रहकर कष्ट भोगूँ - इन दोनों में से कौन-सा मेरे लिए हितकर होगा? 38 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  6.106.38-39h 
अवध्यानां वधं कृत्वा राज्यं वा नरकोत्तरम्॥ ३८॥
दु:खानि वनवासे वा किं नु मे सुकृतं भवेत्।
 
 
अनुवाद
प्रभु! अवध के महापुरुषों को मारकर मैं नरक से भी बदतर राज्य प्राप्त करूँ अथवा वनवास में रहकर कष्ट भोगूँ - इन दोनों में से कौन-सा मेरे लिए हितकर होगा? 38 1/2॥
 
Lord! By killing the great men of Awadh, should I obtain a kingdom worse than hell or should I suffer by living in exile - which of these two will be beneficial for me? 38 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)