अवध्यानां वधं कृत्वा राज्यं वा नरकोत्तरम्॥ ३८॥
दु:खानि वनवासे वा किं नु मे सुकृतं भवेत्।
अनुवाद
प्रभु! अवध के महापुरुषों को मारकर मैं नरक से भी बदतर राज्य प्राप्त करूँ अथवा वनवास में रहकर कष्ट भोगूँ - इन दोनों में से कौन-सा मेरे लिए हितकर होगा? 38 1/2॥
Lord! By killing the great men of Awadh, should I obtain a kingdom worse than hell or should I suffer by living in exile - which of these two will be beneficial for me? 38 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)