श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 34-37h
 
 
श्लोक  6.106.34-37h 
यत् पुरा कथितं वीर राज्ञां तेषां समागमे॥ ३४॥
विराटनगरे तात संजयस्य समीपत:।
भीष्मद्रोणमुखान् सर्वान् धार्तराष्ट्रस्य सैनिकान्॥ ३५॥
सानुबन्धान् हनिष्यामि ये मां योत्स्यन्ति संगरे।
इति तत् कुरु कौन्तेय सत्यं वाक्यमरिंदम॥ ३६॥
क्षत्रधर्ममनुस्मृत्य युध्यस्व विगतज्वर:।
 
 
अनुवाद
वीर! पितामह! पूर्वकाल में जब विराटनगर में समस्त राजा एकत्र हुए थे, तब आपने उनके तथा संजय के समक्ष कहा था कि ‘मैं युद्ध में मेरा सामना करने के लिए आने वाले भीष्म, द्रोण आदि दुर्योधन के समस्त सैनिकों को उनके सगे-संबंधियों सहित मार डालूँगा।’ हे शत्रुओं का नाश करने वाले कुन्तीपुत्र! अपनी उस बात को सत्य करो। क्षत्रियधर्म का स्मरण करते हुए, समस्त चिंताओं को त्यागकर युद्ध करो।’
 
Valiant! Father! In the past, when all the kings had gathered in Viratnagar, you had said in front of them and in front of Sanjaya that 'I will kill all the soldiers of Duryodhan, including Bhishma, Drona, etc., along with their relatives, who will come to face me in the war.' O son of Kunti, destroyer of enemies! Make that statement of yours come true. Remembering the Kshatriyadharma, leaving all worries behind, fight the war.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)