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mahabharat 6.106.32-33h: उस सेना में भगदड़ देखकर यादवनन्दन भगवान श्रीकृष्ण ने अपना उत्तम रथ रोककर कुन्तीकुमार अर्जुन से कहा-॥32 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  6.106.32-33h 
प्रभज्यमानं सैन्यं तु दृष्ट्वा यादवनन्दन:॥ ३२॥
उवाच पार्थं बीभत्सुं निगृह्य रथमुत्तमम्।
 
 
अनुवाद
उस सेना में भगदड़ देखकर यादवनन्दन भगवान श्रीकृष्ण ने अपना उत्तम रथ रोककर कुन्तीकुमार अर्जुन से कहा-॥32 1/2॥
 
Seeing the stampede in that army, Yadavnandan Lord Shri Krishna stopped his excellent chariot and said to Kuntikumar Arjun -॥ 32 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)