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mahabharat 6.106.31-32h: उस समय पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर की सारी सेना सिंह से भयभीत गायों के झुंड के समान व्याकुल हो गई थी। रथ के पहिए उखड़ गए थे और सभी सैनिक पीड़ा से कराह रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  6.106.31-32h 
तद् गोकुलमिवोद्‍भ्रन्तमुद्‍भ्रान्तरथकूबरम्॥ ३१॥
ददृशे पाण्डुपुत्रस्य सैन्यमार्तस्वरं तदा।
 
 
अनुवाद
उस समय पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर की सारी सेना सिंह से भयभीत गायों के झुंड के समान व्याकुल हो गई थी। रथ के पहिए उखड़ गए थे और सभी सैनिक पीड़ा से कराह रहे थे।
 
At that time the entire army of Pandava's son Yudhishthira was in a state of panic like a herd of cows (scared of a lion). The wheels of the chariot were toppled and all the soldiers were crying in pain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)