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श्लोक  6.106.30-31h 
विमुच्य कवचानन्ये पाण्डुपुत्रस्य सैनिका:॥ ३०॥
प्रकीर्य केशान् धावन्त: प्रत्यदृश्यन्त सर्वश:।
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर के अन्य सैनिक अपने कवच उतारकर, बिखरे बालों के साथ सभी दिशाओं में भागते हुए दिखाई दिए।
 
The other soldiers of Yudhishthira, son of Pandu, were seen taking off their armour and running in all directions with their hair dishevelled. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)