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mahabharat 6.106.29-30h: ईश्वर द्वारा प्रेरित उस भयंकर नरसंहार में एक पिता ने अपने पुत्र को, एक पुत्र ने अपने पिता को तथा एक मित्र ने अपने प्रिय मित्र को मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 6.106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  6.106.29-30h 
जघानात्र पिता पुत्रं पुत्रश्च पितरं तथा॥ २९॥
प्रियं सखायं चाक्रन्दे सखा दैवबलात् कृत:।
 
 
अनुवाद
ईश्वर द्वारा प्रेरित उस भयंकर नरसंहार में एक पिता ने अपने पुत्र को, एक पुत्र ने अपने पिता को तथा एक मित्र ने अपने प्रिय मित्र को मार डाला।
 
In that terrible carnage, inspired by God, a father killed his son, a son killed his father, and a friend killed his dear friend. 29 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)