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mahabharat 6.106.27-28h: महाराज! जब महेंद्र के समान पराक्रमी भीष्मजी ने उन्हें मार डाला, तब उस विशाल सेना में भगदड़ मच गई। दो आदमी भी एक साथ नहीं दौड़ सकते थे।   |   mahabharat अध्याय 6.106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  6.106.27-28h 
महेन्द्रसमवीर्येण वध्यमाना महाचमू:॥ २७॥
अभज्यत महाराज न च द्वौ सह धावत:।
 
 
अनुवाद
महाराज! जब महेंद्र के समान पराक्रमी भीष्मजी ने उन्हें मार डाला, तब उस विशाल सेना में भगदड़ मच गई। दो आदमी भी एक साथ नहीं दौड़ सकते थे।
 
Maharaj! There was a stampede in that huge army when Bhishmaji, who was as valiant as Mahendra, killed them. Not even two men could run together. 27 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)