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mahabharat 6.106.22-25h: हे प्रज्ञानाथ! वहाँ की पृथ्वी बाणों सहित टूटे हुए रथों, मारे गए सारथिओं, कटे हुए बाणों, कवचों, मेखलाओं, गदाओं, भिन्दिपालों, तीखे भालों, फटे हुए अनुकर्षों, उपासकों, पहियों, कटी हुई भुजाओं, धनुषों, तलवारों, कुण्डलों, नूपुरों, अंगुलियों के थालों सहित सिर, गिरी हुई ध्वजाओं और धनुषों से आच्छादित हो गई थी।   |   mahabharat अध्याय 6.106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 22-25h
 
 
श्लोक  6.106.22-25h 
सवरूथै रथैर्भग्नै रथिभिश्च निपातितै:।
शरै: सुकवचैश्छिन्नै: पट्टिशैश्च विशाम्पते॥ २२॥
गदाभिर्भिन्दिपालैश्च निशितैश्च शिलीमुखै:।
अनुकर्षैरुपासङ्गैश्चक्रैर्भग्नैश्च मारिष॥ २३॥
बाहुभि: कार्मुकै: खड्गै: शिरोभिश्च सकुण्डलै:।
तलत्रैरङ्गुलित्रैश्च ध्वजैश्च विनिपातितै:॥ २४॥
चापैश्च बहुधा च्छिन्नै: समास्तीर्यत मेदिनी।
 
 
अनुवाद
हे प्रज्ञानाथ! वहाँ की पृथ्वी बाणों सहित टूटे हुए रथों, मारे गए सारथिओं, कटे हुए बाणों, कवचों, मेखलाओं, गदाओं, भिन्दिपालों, तीखे भालों, फटे हुए अनुकर्षों, उपासकों, पहियों, कटी हुई भुजाओं, धनुषों, तलवारों, कुण्डलों, नूपुरों, अंगुलियों के थालों सहित सिर, गिरी हुई ध्वजाओं और धनुषों से आच्छादित हो गई थी।
 
Respected Prajnaath! The earth there was covered with broken chariots along with their arrows, the slain charioteers, the cut arrows, armour, belts, maces, Bhindipalas, sharp spears, the torn anukarshas, ​​upasangas, wheels, the severed arms, bows, swords, heads along with earrings, anklets, finger-plates, dropped flags and bows cut into many pieces and fallen down.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)