श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.106.21 
भग्नाक्षोपस्करान् कांश्चिद् भग्नचक्रांश्च भारत।
अपश्याम महाराज शतशोऽथ सहस्रश:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे भरतनन्दन! महाराज! हमने वहाँ सैकड़ों-हजारों रथ देखे जिनके धुरे आदि टूटे हुए थे और पहिये टुकड़े-टुकड़े हो गए थे।
 
O Bharatanandan! Maharaj! We saw there hundreds and thousands of chariots whose axles etc. were broken and the wheels were shattered into pieces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)