श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  6.106.17-18h 
नासज्जन्त तनुत्रेषु भीष्मचापच्युता: शरा:।
हतवीरान् रथान् राजन् संयुक्ताञ्जवनैर्हयै:॥ १७॥
अपश्याम महाराज ह्रियमाणान् रणाजिरे।
 
 
अनुवाद
महाराज! भीष्म के धनुष से छूटे हुए बाण कवच में नहीं फँसते थे (वे कवच को भेदकर अन्दर घुस जाते थे)। महाराज! हमने युद्धस्थल में ऐसे अनेक रथ देखे, जिनके सारथि और सारथि मारे गए थे; परन्तु उनमें तेज घोड़े जुते होने के कारण वे इधर-उधर खींचे जा रहे थे।
 
King! The arrows shot from Bhishma's bow did not get stuck in the armour (they would pierce them and enter inside). Maharaj! We saw many such chariots in the battlefield, whose charioteers and charioteers had been killed; but because they were harnessed by fast horses, they were being pulled here and there. 17 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)