श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  6.106.15-16 
तस्य ज्यातलनिर्घोषं विस्फूर्जितमिवाशने:॥ १५॥
निशम्य सर्वभूतानि समकम्पन्त भारत।
अमोघा ह्यपतन् बाणा: पितुस्ते भरतर्षभ॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उनके धनुष की टंकार वज्र की गड़गड़ाहट के समान थी। हे भरत! उसे सुनकर समस्त प्राणी काँप उठते थे। हे भरतश्रेष्ठ! आपके चाचा भीष्म के बाण कभी व्यर्थ नहीं जाते थे।॥ 15-16॥
 
The twanging sound of his bowstring was like the rumbling of thunderbolts. O Bharata! All beings trembled on hearing it. O best of the Bharatas! Your uncle Bhishma's arrows never went in vain.॥ 15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)