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mahabharat 6.106.10-11h: महाराज! पाण्डवों ने भी पितामह भीष्म को घेर लिया। चारों ओर से रथियों के समूहों से घिरे हुए अपराजित योद्धा भीष्म घने वन में प्रज्वलित अग्नि के समान अपने शत्रुओं को जलाते हुए प्रज्वलित होने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 106: भीष्मके द्वारा पराजित पाण्डवसेनाका पलायन और भीष्मको मारनेके लिये उद्यत हुए श्रीकृष्णको अर्जुनका रोकना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  6.106.10-11h 
तथैव पाण्डवा राजन् परिवव्रु: पितामहम्।
स समन्तात् परिवृतो रथौघैरपराजित:॥ १०॥
गहनेऽग्निरिवोत्सृष्ट: प्रजज्वाल दहन् परान्।
 
 
अनुवाद
महाराज! पाण्डवों ने भी पितामह भीष्म को घेर लिया। चारों ओर से रथियों के समूहों से घिरे हुए अपराजित योद्धा भीष्म घने वन में प्रज्वलित अग्नि के समान अपने शत्रुओं को जलाते हुए प्रज्वलित होने लगे।
 
King! The Pandavas also surrounded Grandfather Bhishma. Surrounded by groups of chariots from all sides, the undefeated warrior Bhishma started blazing like a fire lit in a dense forest, burning his enemies. 10 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)