श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 105: दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये आदेश, युधिष्ठिर और नकुल-सहदेवके द्वारा शकुनिकी घुड़सवार-सेनाकी पराजय तथा शल्यके साथ उन सबका युद्ध  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  6.105.33-34 
ततो भीमो महाबाहुर्दृष्ट्वा राजानमाहवे॥ ३३॥
मद्रराजरथं प्राप्तं मृत्योरास्यगतं यथा।
अभ्यपद्यत संग्रामे युधिष्ठिरममित्रजित्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शत्रुओं को जीतने वाले पराक्रमी भीमसेन ने युद्धस्थल में मद्रराज के रथ के पास राजा युधिष्ठिर को मरणासन्न अवस्था में पड़े हुए देखा, तो वे युद्ध के लिए वहाँ आ पहुँचे।
 
Then the powerful Bhimasena, the conqueror of enemies, seeing King Yudhishthira lying near the chariot of the Madra king in the battlefield as if he was on the verge of death, arrived there for the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)