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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 105: दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये आदेश, युधिष्ठिर और नकुल-सहदेवके द्वारा शकुनिकी घुड़सवार-सेनाकी पराजय तथा शल्यके साथ उन सबका युद्ध
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श्लोक 32
श्लोक
6.105.32
मद्रराजोऽपि तान् सर्वानाजघान त्रिभिस्त्रिभि:।
युधिष्ठिरं पुन: षष्टॺा विव्याध निशितै: शरै:॥ ३२॥
अनुवाद
तब मद्रराज शल्य ने भी तीन बाणों से युधिष्ठिर को घायल कर दिया और उन पर साठ तीखे बाण छोड़े।
Then Madra king Shalya also injured him with three arrows. Then he shot sixty sharp arrows at Yudhishthira.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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