श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 105: दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये आदेश, युधिष्ठिर और नकुल-सहदेवके द्वारा शकुनिकी घुड़सवार-सेनाकी पराजय तथा शल्यके साथ उन सबका युद्ध  »  श्लोक 2-3h
 
 
श्लोक  6.105.2-3h 
एष शूरो महेष्वासो भीष्म: शूरनिषूदन:॥ २॥
छादित: पाण्डवै: शूरै: समन्ताद् भरतर्षभ।
 
 
अनुवाद
‘भरतश्रेष्ठ! महाधनुर्धर और वीर योद्धाओं का संहार करने वाले भीष्मजी को महाबली पाण्डवों ने चारों ओर से घेर लिया है। 2 1/2॥
 
‘Bharatshrestha! Bhishma, the great archer and the valiant destroyer of warriors, is surrounded from all sides by the mighty Pandavas. 2 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)