श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 105: दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये आदेश, युधिष्ठिर और नकुल-सहदेवके द्वारा शकुनिकी घुड़सवार-सेनाकी पराजय तथा शल्यके साथ उन सबका युद्ध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.105.14 
उत्पतद्भिश्च तैस्तत्र समुद्भूतं महद् रज:।
दिवाकररथं प्राप्य छादयामास भास्करम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ घोड़ों के कूदने से बहुत-सी धूल उठी, जो सूर्य के रथ के पास पहुँचकर उसे ढक गई॥14॥
 
There, a great amount of dust arose due to the jumping of the horses. It reached near the Sun's chariot and covered it.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)