श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  6.104.6-7 
अपरे तु तदाऽऽदाय वाजिनागरथान् रणे।
त्वरया परया युक्ता: प्राद्रवन्त विशाम्पते॥ ६॥
पादाताश्चापि शस्त्राणि समुत्सृज्य महारणे।
निरपेक्षा व्यधावन्त तेन तेन स्म भारत॥ ७॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! उस समय अन्य लोग भी अपने हाथी, घोड़े और रथों सहित बड़ी उतावली के साथ युद्धभूमि से भाग गये। भारत! उस महायुद्ध में पैदल सैनिक भी अपने अस्त्र-शस्त्र त्यागकर, उनसे कुछ भी आशा न रखते हुए, जिस ओर भी रास्ता मिला, उसी ओर भागने लगे।
 
Prajanath! At that time the other people fled from the battlefield in great haste along with their elephants, horses and chariots. Bhaarat! In that great war even the foot soldiers threw away their weapons and without expecting anything from them started running in whichever way they could find.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)