तत्पश्चात् युद्ध में विजय की इच्छा रखने वाले कौरव और पाण्डव आपस में भयंकर युद्ध करने लगे, जो रोंगटे खड़े कर देने वाला था ॥38॥
Thereafter, the Kauravas and the Pandavas, who desired to be victorious in the war, fought a fierce battle with each other, which was spine-chilling. ॥ 38॥
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि वार्ष्णेययुद्धे चतुरधिकशततमोऽध्याय:॥ १०४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें सात्यकिका युद्धविषयक एक सौ चारवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)