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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध
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श्लोक 36
श्लोक
6.104.36
छित्त्वा शक्तिं तु गाङ्गेय: सात्यकिं नवभि: शरै:।
आजघानोरसि क्रुद्ध: प्रहसञ्छत्रुकर्शन:॥ ३६॥
अनुवाद
गंगापुत्र शत्रुसूदन की शक्ति को काटकर अट्टहास करते हुए भीष्म ने क्रोध में आकर सात्यकि की छाती में नौ बाण मारे।
Laughing after cutting off Shakti, Shatrusudan, son of Ganga, Bhishma in anger shot nine arrows into Satyaki's chest.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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