श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.104.34 
वार्ष्णेयभुजवेगेन प्रणुन्ना सा महाहवे।
अभिदुद्राव वेगेन कालरात्रिर्यथा नरम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उस महासमर में सात्यकि की भुजाओं के बल से प्रेरित होकर वह शक्ति बड़े वेग से भीष्म की ओर बढ़ी, मानो मृत्युरूपी रात्रि किसी मनुष्य की ओर बढ़ रही हो।
 
In that great battle that Shakti, driven by the force of Satyaki's arms, moved towards Bhishma with great speed, as if the night of death were moving towards a human being. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)