श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.104.32 
अनासाद्य तु वार्ष्णेयं शक्ति: परमदारुणा।
न्यपतद् धरणीपृष्ठे महोल्केव महाप्रभा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वह भयंकर शक्ति सत्यकीति तक न पहुँचकर एक विशाल, अत्यंत चमकीली उल्का के समान पृथ्वी पर गिर पड़ी।
 
That terrifying power, without reaching Satyakiti, fell upon the earth like a huge, extremely brilliant meteor.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)