श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.104.31 
तामापतन्तीं सहसा मृत्युकल्पां सुदुर्जयाम्।
व्यंसयामास वार्ष्णेयो लाघवेन महायशा:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उस अत्यन्त भयंकर मृत्युरूपी शक्ति को सहसा आते देख महाप्रतापी एवं यशस्वी सत्यकीन ने अपनी चपलता के कारण उसे परास्त कर दिया ॥31॥
 
Seeing that very formidable power in the form of death suddenly coming, the great and famous Satyakine, due to his agility, defeated it. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)