vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध
»
श्लोक 30
श्लोक
6.104.30
तस्यायसीं महाशक्तिं चिक्षेपाथ पितामह:।
हेमचित्रां महावेगां नागकन्योपमां शुभाम्॥ ३०॥
अनुवाद
पितामह के पास लोहे की बनी हुई एक विशाल शक्ति थी, जो सोने से जड़ी हुई, अत्यन्त वेगवान, सर्प के समान आकार वाली और सुन्दर थी ॥30॥
The grandfather wielded a huge power made of iron, which was studded with gold, very swift, shaped like a snake and beautiful. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×