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mahabharat 6.104.24-25h: इस प्रकार युद्ध के मुहाने पर द्रोणाचार्य से पीड़ित राजा द्रुपद अपने पूर्व वैर का स्मरण करके अपने तीव्र घोड़ों पर सवार होकर वहाँ से भाग गए।   |   mahabharat अध्याय 6.104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  6.104.24-25h 
पीडॺमानस्ततो राजा द्रुपदो वाहिनीमुखे॥ २४॥
अपायाज्जवनैरश्वै: पूर्ववैरमनुस्मरन्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार युद्ध के मुहाने पर द्रोणाचार्य से पीड़ित राजा द्रुपद अपने पूर्व वैर का स्मरण करके अपने तीव्र घोड़ों पर सवार होकर वहाँ से भाग गए।
 
Thus, at the mouth of the battle, King Drupada, afflicted by Dronacharya, remembering his past enmity, fled from there on his swift horses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)